Wednesday, February 12, 2014

Poem!!!!!!!

नया है जमाऩा अजब है दस्तूर
..नये का ढ़ोंग-प्रपंच बुजुर्ग हुये मजबूर।

बाप मरे अँधेरे मेँ
...बेटे का नाम पावर हाऊस

नाम रखा शेरसिंह...
..मेहरारू के आगे बन गया 'माऊस'।

मम्मी पहने साड़ी
...बिटिया जगह-जगह से जिंस फाड़ी।

बहना बाल कटाये
..भईया लम्बी चोटी लटकाये।

बहन जी शर्ट-पैंट में
...भाई जी हेयरबैण्ड कुण्डल लटकाये।

बाप खाये रोटी-चावल
..बेटा पिज्जा-बर्गर ही खाये।

बापू पाथे गाय-गोबर
....पुत्तर घुमाये कुत्ता

बाप पहने गोल्ड स्टार
...पुत्तर रिबॉक का जुत्ता।

बाप-माई प्रणाम कबहुँ ना...
फेसबुक पे गुडमॉर्निंग होये।

बनिये भी धनिया उधार ना दे..
..बस पाकिस्तान कि ऐसी तैसी होये।

मैय्या का आँचल सर पे
..नव पिढ़ी दुपट्टा भी खोये

घर में आटा-दाल खत्म
...बस फेसबुक पे मोदी-कजरी होय

आज के लिये इतना ही काफी
...चले हम भी सोये

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